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Showing posts with the label Aarti

Shri Guru Vandana Arati Hindi

ऐ मेरे गुरुदेव करुणा सिंधु करुणा कीजिये   I हूँ अधम आधीन अशरण , अब शरण में लीजिये I ऐ मेरे गुरुदेव करुणा सिंधु करुणा कीजिये   I हूँ अधम आधीन अशरण , अब शरण में लीजिये I ऐ मेरे गुरुदेव करुणा सिंधु करुणा कीजिये   I

Om Jay Jagdish Hare in Hindi

ॐ    जय   जगदीश   हरे   ॐ जय जगदीश हरे , स्वामी जय जगदीश हरे भक्त जनों के संकट , दास जनों के संकट , क्षण में दूर करे ||   जो ध्यावे फल पावे , दुख बिनसे मन का स्वामी दुख बिनसे मन का सुख सम्पति घर आवे , कष्ट मिटे तन का || ॐ जय जगदीश हरे || मात पिता तुम मेरे , शरण गहूं मैं किसकी स्वामी शरण गहूं मैं किसकी तुम बिन और न दूजा , आस करूं मैं जिसकी || ॐ जय जगदीश हरे || तुम पूरण परमात्मा , तुम अंतरयामी स्वामी तुम अंतरयामी पारब्रह्म परमेश्वर , पारब्रह्म परमेश्वर , तुम सब के स्वामी || ॐ जय जगदीश हरे ||

Shree Ambe Durga Ji Aarti in Hindi

जय अम्बे गौरी , मैया जय श्यामा गौरी I तुमको निशदिन ध्यावत हरी ब्रह्मा शिवजी II मांग सिन्दूर विराजत टीको मृगमद को I उज्जवल से दोउ नैना चन्द्रवदन नीको II कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजे I रक्तपुष्प गल माला कण्ठन पर साजे II केहरि वाहन राजत खड्ग खप्पर धारी I सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुःख हारी II कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती I कोटिक चन्द्र दिवाकर सम राजत ज्योति II शुम्भ निशुम्भ बिदारे महिषासुर घाती I धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती   II चंड मुंड संहारे शोणित बीज हरे   I मधु कैटभ दोउ मारे सुर भयहीन करे II ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी I आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी II चौसठ योगिनी गावत नृत्य करत भैरू I बाजत ताल मृदंगा अरु बाजत डमरू   II तुम ही जग की माता तुम ही हो भरता   I भक्तन की दुःख हरता सुख सम्पति करता   II भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी I मनवांछित फल पावत सेवत नर न...

Shree Shiiv Aarti in Hindi

जय शिव ओंकारा ,  ॐ जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा ,  विष्णु ,  सदाशिव ,  अर्द्धांगी धारा॥ ॥ जय शिव ओंकारा ... ॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॥ जय शिव ओंकारा ... ॥ दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥   ॥ जय शिव ओंकारा ... ॥ अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी। चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ ॥ जय शिव ओंकारा ... ॥ श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे। सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॥ जय शिव ओंकारा ... ॥ कर के मध्य कमंडल चक्र त्रिशूलधारी। सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥ ॥ जय शिव ओंकारा ... ॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥ ॥ जय शिव ओंकारा ... ॥ त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे। कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे॥ ॥ जय शिव ओंकारा ... ॥ लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा। पार्वती अर्द्धांगी ,  शिवलहरी गंगा॥ ॥ जय ...