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Om Jay Jagdish Hare in Hindi

ॐ    जय   जगदीश   हरे   ॐ जय जगदीश हरे , स्वामी जय जगदीश हरे भक्त जनों के संकट , दास जनों के संकट , क्षण में दूर करे ||   जो ध्यावे फल पावे , दुख बिनसे मन का स्वामी दुख बिनसे मन का सुख सम्पति घर आवे , कष्ट मिटे तन का || ॐ जय जगदीश हरे || मात पिता तुम मेरे , शरण गहूं मैं किसकी स्वामी शरण गहूं मैं किसकी तुम बिन और न दूजा , आस करूं मैं जिसकी || ॐ जय जगदीश हरे || तुम पूरण परमात्मा , तुम अंतरयामी स्वामी तुम अंतरयामी पारब्रह्म परमेश्वर , पारब्रह्म परमेश्वर , तुम सब के स्वामी || ॐ जय जगदीश हरे ||

Shree Ambe Durga Ji Aarti in Hindi

जय अम्बे गौरी , मैया जय श्यामा गौरी I तुमको निशदिन ध्यावत हरी ब्रह्मा शिवजी II मांग सिन्दूर विराजत टीको मृगमद को I उज्जवल से दोउ नैना चन्द्रवदन नीको II कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजे I रक्तपुष्प गल माला कण्ठन पर साजे II केहरि वाहन राजत खड्ग खप्पर धारी I सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुःख हारी II कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती I कोटिक चन्द्र दिवाकर सम राजत ज्योति II शुम्भ निशुम्भ बिदारे महिषासुर घाती I धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती   II चंड मुंड संहारे शोणित बीज हरे   I मधु कैटभ दोउ मारे सुर भयहीन करे II ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी I आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी II चौसठ योगिनी गावत नृत्य करत भैरू I बाजत ताल मृदंगा अरु बाजत डमरू   II तुम ही जग की माता तुम ही हो भरता   I भक्तन की दुःख हरता सुख सम्पति करता   II भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी I मनवांछित फल पावत सेवत नर न...

Shree hanuman Chalisa in Hindi

॥दोहा॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन - कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥ ॥चौपाई॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥ राम दूत अतुलित बल धामा । अञ्जनि - पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥ महाबीर बिक्रम बजरङ्गी । कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥ कञ्चन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥ सङ्कर सुवन केसरीनन्दन । तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥ बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥७॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥ भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥ लाय सञ्जीवन लखन जियाये । श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥ रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई । तुम...